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Human rise

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मानव उत्थान के लिए हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह समाज के लिए कुछ करे। इसमें चाहे वह प्रकृति को संवारने की बात हो या मानव उत्थान की। इसलिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही चाहिए। जिसे बेहतर हो समाज  पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव आज देश में तमाम मुद्दों पर चर्चा और बहस छिड़ी हुई है। लोगों के अंतर तमाम ख्वाहिशें हैं और उम्मीदें भी। मगर, पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव के बारे में उन्हें तनिक भी चिंता नहीं है। यदि हमारा जीवन ही नहीं होगा तो सभी चीजें बेकार होंगी। यदि हम एक तालाब भी पुनर्जीवित कर सकें तो हमारी सार्थकता होगी। प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं है । फिर भी हम सचेत नहीं होते।हमें ऐसे पौधे लगाने चाहिए, जो पर्यावरण को बचाने में सहायक हों। आने वाले दिनों में पानी की बड़ी समस्या खड़ी होने वाली है। इसलिए हम वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर तेजी से कार्य करना चाहिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कार्य करने की जरूरत है हमें पानी बर्बाद होने से बचाना होगा इसमें क्रांतिकारी कदम उठाने की जरूरत है, वरना स्थिति विकराल हो सकती है।  पर्यावरण और नार...

Education level

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आओ जाने शिक्षा का स्तर शिक्षा का मतलब है सत्य की तलाश - बेशक परम सत्य की तलाश न सही, जो वस्तु फिलहाल सामने मौजूद हो, उसी के सत्य की तलाश सही। विद्यार्थी स्वाभाविक तौर पर जिज्ञासु होते हैं। आध्यात्मिक प्रक्रिया को विद्यार्थियों में अनुशासन लाने का काम करना चाहिए, ताकि वे किसी चीज पर विश्वास न करें लेकिन इसी के साथ वे किसी के प्रति अभद्रता व असम्मान की भावना भी न रखें।अब समय आ गया है कि हम अपनी शिक्षा पद्धति के बारे में पुनर्विचार करें और उसे नए सिरे से तराशें, क्योंकि हमारे पास आर्थिक साधन आने वाले हैं। हमारे पास आज दुनिया तक पहुंचने का ऐसा मौका है जो अब से पहले कभी नहीं था और हमारे पास ऐसा नेतृत्व है, जो इन तमाम बदलावों को साकार करने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ है।  इसके विपरीत अगर हमने अपनी आबादी को अकुशल, लक्ष्य से भटकी हुई, अस्थिर और बिना प्रेरणा के छोड़ दिया तो यही आबादी हमारे लिए सबसे ज्यादा विनाशकारी साबित होगी। आज अरबों डॉलर पैसा भारत से बाहर जा रहा है, क्योंकि लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए बाहर भेज रहे हैं। आज तक हम अपने यहां शिक्षा का वह स्तर और जानकारी नहीं उपलब्ध क...

Scriptural practice

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It is necessary to do devotion. Sant Rampal Ji Maharaj Other details of loss due to non-devotion This power is broken, Pinda Futai, be an account dargah Will be killed in that dargah, will hold fast. Nar-Narayana go to the body, go to the charasi. The words of that day are afraid, be ashamed and not small. I go to Satguru to sacrifice, which will not erase the death. Total family is your family tribe, for example, there is no one. Tied up the dam Panjari, do not carry the well. When the fire was lit, it blew. Puranas arose and then Pandit came, read Garuda behind. Spiritualism: This day means the breath will end on the day. This body-like body will be left on the same day. Then there will be account of sin and virtue in the court of God. Those who do not do devotion or do devotion against Shastra will be taken by the messenger arm of Yama, even if someone is the king of any country, he will be beaten. Saint Garibdas got the God Kabir. Took his soul up. After showing all the...

जीव हत्या पाप है

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अल्लाह/प्रभु ने हम मनुष्यों के खाने के लिए फलदार वृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए हैं, मांस खाने का आदेश नहीं दिया। एक तरफ तो आप भक्ति करते हो, और दूसरी तरफ आप बेजुबान निर्दोष जानवरों की हत्या कर उनका मांस खाते हो। सभी जीव परमात्मा की प्यारी आत्मा है, तो फिर मांस खाने से परमात्मा प्राप्ति कैसे होगी? जीव हिंसा करे,प्रकट पाप सिर होय।निगम पुनि ऐसे पाप ते, भिस्त गया ना कोय। परमात्मा कबीर जी कहते हैं कि जींस हिंसा करने से पाप ही लगता है। ऐसा महापाप करके भिस्त (स्वर्ग) कोई नहीं गया। तो फिर हे भोले मानव फिर ऐसा महापाप क्यों करता है। मांस मछलियां खात है, सुरापान से हेत। ते नर नरकै जाएंगे, मात पिता समेत।। परमेश्वर कबीर जी कहते हैं की जो  जीव हत्या करता है,मांस खाते हैं, वह अपराधी आत्मा मृत्यु उपरांत नरक में जाएंगे, साथ ही मात-पिता भी नरक में जाएंगे। कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दे दान। काशी करौंत ले मरे, तो भी नरक निदान।। तिल के समान भी मछली खाने वाले चाहे करोड़ो गाय दान कर लें, चाहे काशी कारोंत में सिर कटा ले वे नरक में अवश्य जाएंगे  आज़ का मानव समाज मांस खाकर महापाप का भागी ब...

हमारे शास्त्र और सत् भगति

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हमारे शास्त्र और सत् भगति   http://www.jagatgururampalji.org                                    Link this video https://youtu.be/kiwFBWUTlCs     जगत गुरु रामपाल जी   (En) Toggle navigation »  शिव पुराण  »  श्री शिव महापुराण से सार विचार श्री शिव महापुराण से सार विचार शिव महापुराण ‘‘श्री शिव महापुराण (अनुवादक: श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार। प्रकाशक: गोबिन्द भवन कार्यालय, गीताप्रैस गोरखपुर) मोटा टाइप, अध्याय 6, रूद्रसंहिता, प्रथम खण्ड(सृष्टी) से निष्कर्ष‘‘ अपने पुत्र श्री नारद जी के श्री शिव तथा श्री शिवा के विषय में पूछने पर श्री ब्रह्मा जी ने कहा (पृष्ठ 100 से 102) जिस परब्रह्म के विषय में ज्ञान और अज्ञान से पूर्ण युक्तियों द्वारा इस प्रकार विकल्प किये जाते हैं, जो निराकार परब्रह्म है वही साकार रूप में सदाशिव रूप धारकर मनुष्य रूप में प्रकट हुआ। सदा शिव ने अपने शरीर से एक स्त्री को उत्पन्न किया जिसे प्रध...

हमारे शास्त्र और सत् भगति

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                हमारे शास्त्र और सत् भगति                                    भगवान _न_भूलो क्योंकि मरने के बाद मनुष्य का जन्म का हिसाब लिया जाएगा।काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय।चरण कमल में ध्यान रखो, इन दोनों को खोय।।   सास्त्र विरूद्ध साधना करना आत्महत्या करने के समान है :- संत रामपाल दास जी। हिन्दू धर्म के गुरुजन तथा अनुयाई गीता शास्त्र में वर्जित साधना कर रहे हैं जो शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण होने से परमात्मा की भक्ति से मिलने वाले लाभ से वंचित रहते हैं। अनमोल मानव का जीवन नष्ट कर रहे हैं।  जो धार्मिक क्रियाऐं करने का निर्देश धर्म के पवित्र शास्त्रों में वर्णित है। वे ही धार्मिक क्रियाऐं करनी चाहिए, अन्य को अकर्त्तव्य जानकर त्याग देना चाहिए। अधूरे संतों ने पित्तर पूजा, मूर्ति पूजा और श्राद्ध निकलवाने शुरू कर दिए भोले हिन्दू धर्म के श्रद्धालुओं से जो कि शास्त्र विरुद्ध पूजा है। हिन्दू धर्म के वर्तमान के सब गुरुजन, आचार्य,...

Kabir is god

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           Kabir is god http://www.jagatgururampalji.org Link this video https://youtu.be/kiwFBWUTlCs