Human rise
मानव उत्थान के लिए हर व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह समाज के लिए कुछ करे। इसमें चाहे वह प्रकृति को संवारने की बात हो या मानव उत्थान की। इसलिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना ही चाहिए। जिसे बेहतर हो समाज
पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव आज देश में तमाम मुद्दों पर चर्चा और बहस छिड़ी हुई है। लोगों के अंतर तमाम ख्वाहिशें हैं और उम्मीदें भी। मगर, पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव के बारे में उन्हें तनिक भी चिंता नहीं है। यदि हमारा जीवन ही नहीं होगा तो सभी चीजें बेकार होंगी। यदि हम एक तालाब भी पुनर्जीवित कर सकें तो हमारी सार्थकता होगी।
प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं है। फिर भी हम सचेत नहीं होते।हमें ऐसे पौधे लगाने चाहिए, जो पर्यावरण को बचाने में सहायक हों। आने वाले दिनों में पानी की बड़ी समस्या खड़ी होने वाली है। इसलिए हम वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर तेजी से कार्य करना चाहिए
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कार्य करने की जरूरत है हमें पानी बर्बाद होने से बचाना होगा इसमें क्रांतिकारी कदम उठाने की जरूरत है, वरना स्थिति विकराल हो सकती है। पर्यावरण और नारी सशक्तीकरण के क्षेत्र में वह कार्य करना होगा शादी-पार्टी में डिस्पोजल और प्लास्टिक न प्रयोग हो इसके लिए वह क्राकरी के बर्तन उपलब्ध करने की जरूरत है गरीब बच्चों को शिक्षा के साधन उपलब्ध कराने की जरूरत है महिलाओं को स्किल डवलपमेंट पर भी कार्य जरूरत हैं। वह लेबर क्लास के बच्चों को शिक्षित करने का काम जरूरी हैं। बच्चों पर शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कार्य करने की जरूरत है।
प्रदूषण रोकना होगा वायु और ध्वनि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। हमें इसके प्रति जागरूक होना होगा। आज परिवार में अलग-अलग गाडिय़ां लेकर लोग निकलते हैं, जबकि वे एक साथ कहीं भी जा आ सकते हैं। इसे रोकना होगा।
महिलाओं की शिक्षा व आतम निर्भरता जरूरी सिलाई-ब्यूटीशियन, पेंटिंग आदि के माध्यम से लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करना होगा जिसे लड़कियां छोटा-मोटा कारोबार खोलकर अपने पैरों पर खड़ी हो सके
अध्यापक को चाहिए कि वह बच्चों को अपनी संस्कृति और संस्कार से भी जुड़े रहें। इसलिए उन्हें अपनी परंपराओं के बारे में भी बताये
Jab tum lindu samaj bali dete ho to tere bhahwan khush ho jate hain apne ap ki bali kyon nahin dete ho gobar khor
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