हमारे शास्त्र और सत् भगति



                हमारे शास्त्र और सत् भगति
                          
        भगवान _न_भूलो क्योंकि मरने के बाद मनुष्य का जन्म का हिसाब लिया जाएगा।काया तेरी है नहीं, माया कहाँ से होय।चरण कमल में ध्यान रखो, इन दोनों को खोय।।
  सास्त्र विरूद्ध साधना करना आत्महत्या करने के समान है :- संत रामपाल दास जी।
हिन्दू धर्म के गुरुजन तथा अनुयाई गीता शास्त्र में वर्जित साधना कर रहे हैं जो शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण होने से परमात्मा की भक्ति से मिलने वाले लाभ से वंचित रहते हैं। अनमोल मानव का जीवन नष्ट कर रहे हैं।
 जो धार्मिक क्रियाऐं करने का निर्देश धर्म के पवित्र शास्त्रों में वर्णित है। वे ही धार्मिक क्रियाऐं करनी चाहिए, अन्य को अकर्त्तव्य जानकर त्याग देना चाहिए।
अधूरे संतों ने पित्तर पूजा, मूर्ति पूजा और श्राद्ध निकलवाने शुरू कर दिए भोले हिन्दू धर्म के श्रद्धालुओं से जो कि शास्त्र विरुद्ध पूजा है।
हिन्दू धर्म के वर्तमान के सब गुरुजन, आचार्य, शंकराचार्य, सर्व अखाड़ों के महंत, महामण्डलेश्वर तथा जो गीता मनीषि की उपाधि प्राप्त हैं, आदि-आदि सभी शास्त्रज्ञान नेत्रहीन हैं यानि इनको आध्यात्मिक मोतियाबिंद हुआ है।
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के अतिरिक्त सबको आध्यात्मिक मोतियाबिंद का रोग है। इनको अपने हिन्दू धर्म के शास्त्रों का ही ज्ञान नहीं है।




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ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
शिशुम् जज्ञानम् हर्य तम् मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निमरूतः गणेन।
कविर्गीर्भि काव्येना कविर् सन्त् सोमः पवित्राम् अत्येति रेभन्।।17।।

ऋग्वेद मंडल 9, 
 के शुक्त 82,मन्त्र 1,2 में (परमात्मा राजा के समान दर्शनीय है, वह अपने साधक के पाप कर्मों का नाश कर देता है)
मंडल 9 के शुक्त 96, मंत्र 16,17 में
(उस परमात्मा का श्रेष्ट गुप्त नाम  बताया है- उसका नाम कबीर हैं।)
भावार्थ - वेद बोलने वाला ब्रह्म कह रहा है कि विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कविर्गिभिः अर्थात् कबीर बाणी द्वारा निर्मल ज्ञान अपने हंसात्माओं अर्थात् पुण्यात्मा अनुयाइयों को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के द्वारा सम्बोधन करके अर्थात् उच्चारण करके वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही होता है।


गीता जी अध्याय 16 श्लोक 23_24 में प्रमाण है कि जो साधक शास्त्र विधि को त्यागकर मनमाना आचरण करता है और करवाता है उसे किसी तरह का कोई लाभ नहीं।

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